Chanakya Thoughts in Hindi – Suvichar & Inspiring Quotes

  1. “मधुर वचन सभी को संतुष्ट करते हैं इसलिए हमेशा मधुर वचन बोलने चाहिए । जो व्यक्ति मीठे वचन बोलते है, उनसे सभी प्रसन्न रहते है इसलिए मधुरबोलने में कैसी दरिद्रता ?      चाणक्य””

    Sweet words satisfy all; therefore, always speak sweet words. Those who speak sweet words, everyone remains happy with them; therefore,  what stops you from speaking sweet words?   Chanakya”

  2. “सभा में जो दूसरों के व्यक्तिगत दोषों को दिखाता है, वह वास्तव में अपने दोष को दिखाता है ।     चाणक्य”

    Person who make public personal flaws of a person in meeting, actually shows his own flaws.”  Chanakya

  3. “शत्रु द्वारा किये गए स्नेहपूरण (अच्छे) व्यवहार को भी दोषमुक्त नहीं समझना चाहिए ।      चाणक्य”

    Affection filled (good) behavior shown by enemy should not be considered error free.      Chanakya”

  4. “काम चाहे छोटा हो या बड़ा, एक बार हाथ में लेने के बाद उसे कभी छोड़ना नहीं चाहिए । अपनी पूरी लगन और सामर्थ्य से उस काम को पूरा करना चाहिए । यह गुण हमें सिंह से लेना चाहिए, जो एक बार पकड़े हुए शिकार को कदापि नहीं छोड़ता ।     चाणक्य “
    “Work Whether Small or Large, Once you have taken it in your hand you should never leave it. You must complete it with full passion and power. Take this quality from Lion who never leaves its prey after catching it.    Chanakya
  5. “मनुष्य स्वयं ही अपने कर्मो के द्वारा जीवन  में  दुःखों को बुलाता है  ।      चाणक्य ”
    “A person invites sorrows in life through his deeds.   Chanakya”
  6. “मन से विचारे गए कार्य को कभी किसी से नहीं कहना चाहिए, अपितु उसे मंत्र की तरह रक्षित करके अपने सोचे हुए कार्य को करते रहना चाहिए ।   चाणक्य”
    “Don’t disclose your plans to others, however, concentrate on them like a mantra to make them success.       Chanakya “
  7. “बुद्धिमान व्यक्ति धन के नाश को, मन के संताप को, पत्नी के दोषों को, ठगे जाने की बात को और आपमान को किसी से नहीं कहते है ।    चाणक्य”
    “Intelligent person never discloses about decay of money,agony of mind, flaws of wife, being cheated and humiliation to others.   Chanakya “
  8. “नीच व्यक्ति उपकार करने वाले का भी अपकार (अहित) ही करता है । चाणक्य””

    Ignoble Person even harms the person who helped him.   Chanakya”


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